Friday, October 30, 2009

तस्वीरों में लाहुल

सर्दियों में तो लगभग रोज़ ही ऐसी कसरत होती है। बर्फ पड़ी है तो फैंकना तो पड़ेगा ही। अक्टूबर में बर्फ ने लाहुल का नज़ारा बदल कर रख दिया।
बर्फ जब पड़ती है तो दूर-दूर तक कुछ ऐसे चमक बिखरती है हर तरफ़ झक सफ़ेद।

खेतों से आलू निकालने की जल्दी है। तुम फोटो खींचते रहो।


नीला आकाश नीली नदी!!



देखो, हमाले खेत की मूली!!!




सर्दियों में सफ़ेद, गर्मियों हरा। ऐसा ही है लाहुल।





पहाड़ से बहता नीर, मिल जाऐगा नदी में।






झरने का कल-कल बहता ठंडा पानी।






सिस्सू वाटरफाल, रोहतांग सुरंग निकलने पर ये खूबसूरत डेस्टिनेशन होगा।








पहाड़ पर बर्फ का जखीरा! चोटियों पर ग्लेशियर का दृश्य।









बिलिंग से जिला मुख्यालय केलंग

11 comments:

आर. अनुराधा said...

अजय जी, बधाई इस नए ब्लॉग के लिए। और इसके लिए धन्यवाद भी, कि देश के इस खूबसूरत लेकिन कम जाने गए हिस्से के बारे में जानने का दुनिया को एक और साधन मिल गया। अगली पोस्ट का बेसब्री से इंतजार है।

अजेय said...

बहुत सुन्दर चित्र हैं. विवरण बढा सकते हो . लगे रहो.

अजेय said...

verification hata deejiye.

JANPAKSH TODAY said...

फोन पर संपर्क करने का प्रयास कर रहा था. तुम्हारी नई पर्सनल सेकेट्री का संदेश सुना. बड़ी मीठी आवाज है. मजा आ गया. खैर ब्लाग शानदार है. फोटो तो कमाल के हैं. अब तुम्हारी लेखनी का इंतजार है. ...खंडूड़ी राकेश.

विनीता यशस्वी said...

bahut hi sunder pictures lagayi hai apne...umid hi ki aap ane wale samay mai is jagah ke baare mai likhenge bhi taki himachal ko achhe se samjhne ka mauk mile...

vijay gaur/विजय गौड़ said...

kya safed barf se dhake laahul ko kabhi dekhne ki himmat juta paayunga !!!
pata nahi|
pr iksha tou hai hi.

Kishore Choudhary said...

बेहद सुंदर तस्वीरें. अभी ब्लॉग तक पहुंचा हूँ विजय भाई के रास्ते... आगे फिर देखूंगा.

roshan thakur said...

vahut achacha prayas hai aap ko vahut shub kamnaye, keep it up

लाहुली said...

आप सभी का धन्यवाद. ब्लॉग का नौसिखया हूँ. आभार जताने में भी लेट हूँ.
# विजय भाई, जरूर आप बर्फ से ढके लाहुल को देख सकेंगे, पूरी तबियत से मन तो बनाओ, हम जैसे हैं न आपके साथ..

ललित शर्मा said...

बहुत अच्छा लगा लाहु्ल आकर, इसका नाम मैने एक फ़िल्म जिसमे परेश रावल लाटरी बेचता है, उसके मुंह से सुना था। इसका नाम भुल गया हुँ। आज चित्रों के माध्यम से देख भी लिया आनंद आ गया। लाहुल आकर्। इस ब्लाग पर मै नाम को लेकर जिज्ञासावश आ गया था। अब इसे फ़ोटो ब्लाग ही बनाओ और सिर्फ़ फ़ोटो लगाओ। प्रकृति के मनोरम दृश्यों से सबको अवगत करवओ। अच्छा रहेगा
आभार्। कभी हमारे दुवारे भी आना स्वागत है।

Rahul Singh said...

बहुत सुंदर, आंखें जुड़ा गईं.